ऊपरी शिमला में ओलावृष्टि से करोड़ों की फसल तबाह, बागवानी विशेषज्ञों ने दी तुरंत स्प्रे करने की सलाह

द हॉर्टिकल्चर पोस्ट, शिमला।

रविवार दोपहर बाद अचानक मौसम बिगड़ने से अप्पर शिमला के कई क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि होने के कारण सेब और नाशपाती की फसल बर्बाद हो गई है। इसके चलते करोड़ों रुपयों की आर्थिकी का नुक़सान हुआ है।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार दोपहर बाद ज़िला शिमला के ठियोग तहसील के नारकंडा, मतियाना गुथान व आसपास के क्षेत्रों, कोटखाई के क्यारवी, खनेटी, जुब्बल के मंढोल, बटारगलू, खड़ापत्थर, रोहरू के नावर, टिक्कर, समरकोट, सुंगरी, छुवारा और रणसार घाटी और चौपाल तहसील की कई पंचायतों में तेज़ बारिश के साथ जमकर ओलावृष्टि हुई। इसके अलावा रामपुर, कुल्लू और मंडी जिले के कई इलाकों में भी ओलावृष्टि हुई है। इसकी वजह से सेब, नाशपाती और गुठलीदार फलों की फसल को खासा नुक़सान हुआ है।

ऐसी परिस्थितियों में बागवानी विशेषज्ञों द्वारा ओला प्रभावित बागीचों में फसलों के उपचार हेतू डॉ यशवंत सिंह परमार बागवानी एवम् वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी और राज्य बागवानी विभाग द्वारा सुझाई छिड़काव सारणी का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। बागवानी विशेषज्ञ डॉक्टर जयंत कुमार शर्मा के मुताबिक बागवान तुरंत 200 लीटर पानी में 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम मिलाकर स्प्रे करें। साथ ही ओलावृष्टि के 72 घन्टे के बाद 1 किलो ग्राम यूरिया के साथ 100ग्राम ज़िंक और 200 ग्राम बोरोन को 200 लीटर पानी मिलाकर स्प्रे करे। इसके अलावा 15 दिन बाद 600 ग्राम ग्राममेन्कोज़ेब के साथ माइक्रोन्युट्रेंट (अग्रोमिन या मल्टीप्लेक्स 500 मिली लीटर) का छिड़काव अवश्य करें।

गौरतलब है कि इस बार सर्दी में अच्छी बारिश व बर्फबारी के बाद फॉलरिंगके दौरान खुशनुमा मौसम रहने से निचले और माध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में सेब की उम्दा सैटिंग हुई थी। नाशपाती व स्टोन फ्रूट्स में भी सामान्य से अधिक फ्रूट सेट हुआ था जिसके चलते बागवानों में अच्छी फसल होने की उम्मीद जगी थी। लेकिन रविवार को शिमला ज़िला के अधिकतर इलाकों में हुई ओलावृष्टि ने बागवानों की उम्मीदें तोड़ दी है। हालांकि ऊंचाई वाले इलाकों में अभी भी फ्लॉवरिंग चल रही है।

मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिन मौसम सामान्य रहेगा। जबकि 24 और 25 अप्रैल को प्रदेश के ऊंचाई व माध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम के करवट बदलने की संभावनाएं है।