कोरोना काल में सेब सीज़न की तैयारियों को लेकर फोग ने किया विशेष बैठक का आयोजन

द युगा हॉर्टिपोस्ट।

हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों की फेडरेशन ऑफ़ एप्पल ग्रोएवर्स (FOAG) ने शनिवार को आगामी सेब सीजन को लेकर कोटखाई के गुम्मा में एक विशेष बैठक का आयोजन किया। यह बैठ फेडरेशन के संयोजक राजीव चौहान की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

फोग द्वारा आयोजित बैठक में भाग लेते बागवान

बैठक में सेब बागवानों को कॉरोना महामारी की चलते पेश आ रही दिक्कतों पर गहनता से मंथन किया गया और इनसे निपटने के लिए सरकार के सामने कुछ सुझाव रखे गए।
FOAG के सदस्यों का कहना है कि सेब सीज़न में मजदूरों की कमी सबसे बड़ी समस्या है। फेडरेशन मुख्यमंत्री एवं हिमाचल सरकार के इस समस्या को हल किये जाने वाले प्रयासों की सराहना करती है। लेकिन जो बयान सरकार की ओर से दिए गए है ऐसा ज़मीनी स्तर होता नज़र नहीं आ रहा है।
उन्होंने कहा कि इस सन्दर्भ में प्रशासन को लिखित दिशानिर्देश ज़ारी किये जाये ताकि बागवानों को समय रहते मजदूरों की उलब्धता सुनिश्चित की जा सके। सेब सीज़न शुरू होने में दो सप्ताह का समय शेष रह गया है और मज़दूर समय पर नहीं पहुंचे तो सेब पेड़ो पर ही सड़ जाएंगे।

वहीं फेडरेशन ने मांग की है कि सरकार पिछले वर्ष कश्मीर की तरह ही हिमाचल में भी ऐ ग्रेड के सेबों का मूल्य तय करें और MIS/समर्थन मूल्य के तहत ख़रीदे जाने वाले सेब का मूल्य भी बढ़ा कर कम से कम 15 रुपये प्रति किलो किया जाए। बागवानों की पिछले साल की बकाया राशि का तुरंत भुगतान किया जाये और इस वर्ष की ख़रीद का नक़द भुगतान 3 माह के भीतर सीधे बागवानों के बैंक खातों में जमा किया जाये।

ट्रे और कार्टन की बढ़ी हुई कीमतों में दखल दे सरकार

फेडरेशन के सदस्यों का कहना है की इस वर्ष कुछ नामी कम्पनीयों ने अचानक ट्रे की कीमतों में भारी वृद्धि कर की है। पिछले साल 410रु से 470रु बिकने वाले ट्रे के बण्डल में 70 रु से लें कर 150 रु तक की बढ़ोतरी हुई है जबकि इस बार सेब का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले बहुत कम आँका गया है।
फेडरेशन ने मांग की है कि सरकार इसमें दखल दे और एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर तुरंत इसकी जांच करवाए।
फेडरेशन के सदस्यों ने हैरानी जताते हुए कहा है कि एच पी एम सी और हिमफैड जैसी सरकारी संस्थाओं ने भी इसे आँख मूंद कर सहमती दी है। यह एक गंभीर विषय है और इसकी जांच होना ज़रूरी है !

27 तरह के फफुंदनाशकों और कीटनाशकों से प्रतिबंध हटाए सरकार

FOAG ने सेब में कीटों एवं फफूंद की रोकथाम के लिए प्रयुक्त होने वाली 27 तरह के रसायनों को प्रतिबंधित करने की खबरों का विरोध करते हुए कहा है कि इन रसायनो का इस्तेमाल कई सालों से किया जा रहा है। यह सस्ती भी है बागवानी विभाग और विश्विद्यालय द्वारा अनुमोदित भी है। इनके प्रतिबंधित होने से गरीब किसान को भारी नुकसान होगा। फेडरेशन ने मांग की है कि सरकार इसमें दख़ल दें ताकि यह रसायन प्रतिबंधित ना हो पाए।

प्रधान मंत्री फ़सल बीमा योजना से लोगों को कोई भी लाभ नहीं पहुँच रहा

मौसम पर आधारित प्रधान मंत्री फ़सल बीमा योजना से लोगों को कोई भी लाभ नहीं पहुँच रहा है ! इसमें ओलों से हुऐ नुकसान को नहीं जोड़ा गया है जबकि सबसे ज़्यादा प्राकृतिक नुकसान ओलों से ही होता है !
फेडरेशन की मांग है कि सरकार इसमें आवश्यक फेरबदल करे। और इस प्रक्रिया में बागवानों को भी शामिल किया जाए।

बैठक में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एप्पल ग्रोवर्स सोसाइटी HAGS के उप प्रधान बलवंत जस्टा, प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन PGA के प्रधान लोकिन्दर बिष्ट, रोहड़ू कृषि समाधान समिति के सलाहकार डॉ अगर दास, नावर वैली एप्पल वेलफेयर सोसाइटी के महिजीत ठाकुर, ईको होर्ट सोसाइटी के डॉ के डी वर्मा, आनी वैली ग्रोवर्स एसोसिएशन, कुल्लू , AVGA के प्रधान राकेश ठाकुर, यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर्स एसोसिएशन YUGA के महासचिव प्रशांत सेहटा, कोटगढ़ हॉर्टिकल्चर एंड एन्वॉयरन्मेंट सोसाइटी, KHES के प्रधान हरी चंद रोच, ठिओग फ्रूट एंड वेजिटेबल ग्रोवर्स एसोसिएशन के महासचिव बी आर शर्मा, प्रगतिशील किसान उत्पादक समिति चिओग के प्रधान सुरिंदर ठाकुर, ईको ग्रोवर्स सोसाइटी खोनी से प्रधान कुणाल रावत और फेडरेशन के समन्वयक कुणाल चौहान, मिडिया प्रभारी राजेश धांटा समेत 30 बागवानों ने भाग लिया।