बोर्डो पेंट करेगा स्टेम कैंकर से बचाव

बोर्डो पेंट करेगा स्टेम कैंकर से बचाव

मोनू भलूनी, सदस्य यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर्स एसोसिएशन (युगा)।

 

हम बुजुर्गों से सुनते आ रहे है कि पतझड़ के तुरंत बाद सेब व नाशपाती के पौधों के तनों पर बोर्डो पेंट लगाया जाना चाहिए। बोर्डो पेंट (चुना) लगाने के वैसे तो कई फायदे है किन्तु पतझड़ के तुरंत बाद की गई सफेदी से पेड़ो के तने को सुरज की तेज़ किरणों से सुरक्षा मिलती है। जब पेड़ की पतियां झड़ जाती है तो सूर्य की किरणे सीधे तने पर गिरती है। इसके कारण तने की छाल जल कर सूखने लगती है जिसे सनबर्न भी कहते है। यही सनबर्न कुछ समय बाद स्टेम केंकर बन जाता है और रोगग्रस्त पेड़ धीरे धीरे सूख कर मर जाता है।
चुने की सफेदी सूर्य की तेज किरणो को परावर्तित करती है जिसके कारण पौधे के तने को किसी प्रकार का नुक़सान नहीं पहुंचता। इसके चलते बागवानी विशेषज्ञ भी अक्टूबर और नवम्बर के महीने  में चुना लगाने का सुझाव देते हैं। बोर्डो पेंट सेब व नाशपाती के पौधों में बैक्टीरिया व फफूंद जनित रोगों की रोकथाम में भी सहायक है। इससे फायर ब्लाइट जैसे रोगों का निदान भी किया जाता है। हालांकि यह रोग अभी तक हिमाचल में सेब और नाशपाती के बगीचों में नहीं पाया गया है।
किन्हीं परिस्थितियों में यदि बागवान अक्टूबर महीने में पेड़ के तने पर चूना लगाने से चूक जाएं तो वह इसे अप्रैल महीने तक कभी भी लगा सकते हैं। कुछ बागवान इस दौरान यह सोचकर भी सेब के पौधों के तनों की सफेदी करते है कि इसके सफेद रंग को देखकर मधुमक्खियां आकर्षित होंगी। जबकि ये धारणा बिल्कुल ही गलत है। मधुमक्खियां फूल को देखकर आकर्षित होती है ना कि चूने के सफेद रंग को देखकर।

बोर्डो पेंट बनाने की विधि

बोर्डो पेंट बनाने के लिए बागवान अलग अलग विधियों का प्रयोग करते है। इनमे वह प्रयोग की जाने वाली सामग्री के अनुपात में कमी या वृद्धि करते है। आमतौर पर 45 लीटर बोर्डो पेंट बनाने के लिए बागवान 30 लीटर पानी के साथ 10 किलो अनबुझा चुना, 2 किलो नीला थोथा और 2 लीटर अलसी का तेल प्रयोग कर सकते है।
सबसे पहले बागवान 10 किलो चुने को किसी बर्तन में 30 लीटर पानी से ज़रूरत अनुसार पानी लेकर उसका पेस्ट तैयार करें। इसके साथ नीले थोथे को महिन पीस कर शेष बचे पानी में इसका घोल तैयार कर दें और किसी बड़े बर्तन में चुने का घोल व नीला थोथा एक साथ मिला दे। इसके बाद उसमे 2 लीटर अलसी का तेल डालकर किसी डंडे या ड्रम मिक्सर की मदद से अच्छे से मिला दें। इस तरह पौधों के तनों पर सफेदी के लिए बोर्डो पेंट बनकर तैयार हो जाएगा।
अत्यधिक घना घोल बनने की स्थिति में उपयोगकर्ता इसमें ज़रूरत अनुसार पानी मिलाकर इसे प्रयोग में ला सकता है। कुछ लोग घर पर बोर्डो पेंट तैयार करने की बजाय बाज़ार से रेडीमेड बोर्डो पेंट लेकर उसका प्रयोग करते है। यह पेंट देखने में अधिक नीला होता है और घर पर बनाए घोल के मुकाबले ज्यादा समय तक पौधों के तनों से चिपका रहता है।
फोटो 1: सनबर्न और कैंकर से ग्रसित सेब के पौधे का तना।
फोटो 2: पौधों के तनों पर बाज़ार में मिलने वाला रेडीमेड बोर्डो पेंट लगाया गया है, जोकि नीला दिखाई देता है।
फोटो 3: घर पर बनाए गए बोर्डो पेंट से लेपित सेब के पौधों के तने। यह देखने में सफ़ेद रंग का होता है।