रूटस्टाॅक की पहेली सुलझाना आसान काम नहीं

अवनीश चौहान, सदस्य यंग एंड युनाईटेड ग्रोवर्स एस्सोसिएशन (युगा)

 

”वक्त कहां ठहरता है किसी की खातिर, जो वक्त के साथ चला वही कीमत समझ पाया है।“ यह पंक्तियां उत्तर भारत के पहाड़ों पर पिछले सौ वर्षों से हो रही सेब प्रजातिय फलों की बागवानी की वर्तमान स्थिति पर बिल्कुल सही प्रतीत होती है। बदलते वक्त के साथ यहां हो रही बागवानी का स्वरूप भी बदल रहा है। अब बागीचों के प्रबंधन कार्यों में कई बदलाव आ गए हैं और अनेकों युवा बागवानी को व्यावसाय के तौर पर अपना रहे हैं। विदेशों से लाई गई नई किस्मों के साथ कई तरह के क्लोनल रूटस्टाॅक भी बागीचों में दिखाई देने लगे है। युवा बागवान जितनी रूचि नई किस्मों में ले रहे हैं उतनी ही रूचि क्लोनल रूटस्टाॅक्स में ले रहे है। लेकिन सही रूटस्टाॅक का चयन कोई पहेली सुलझाने से कम नहीं है।

हालांकि सेब के लिए विभिन्न श्रेणियों में कई तरह के रूटस्टाॅक उपलब्ध है। बावजुद इसके, सभी मायनों में कोई एक परफ़ेक्ट च्वाइस नहीं हो सकता। सही रूटस्टाॅक के चयन में मिट्टी, जलवायु, सहारा देने की प्रणाली, सिंचाई व्यवस्था, पौधों का घनत्व और उस पर तैयार की जाने वाली किस्म की अहम भूमिका रहती है। इन सभी घटकों को ध्यान में रखकर सही रूटस्टाॅक पर तैयार किया गया बागीचा हमेशा बेढंग तरीके से लगे बागीचे के मुकाबले ज्यादा पैदावार देता है।

गौरतलब है कि बौने ओर अर्धबौने रूटस्टाॅक बडे रूटस्टाॅक के मुकाबले जल्दी पैदावार देने शुरू कर देते हैं और इन्हें सहारे और नियमित सिंचाई की आवश्यक्ता होती है। बौने रूटस्टाॅक पर हमेशा नाॅन स्पर किस्में तैयार की जाती है क्योंकि इन रूटस्टाॅक की ग्रोथ कम होती है और स्पर किस्मों के पौधे इन रूटस्टाॅक पर सही आकार नहीं ले पाते है। विगोरस रूटस्टाॅक पर दोनों प्रकार की किस्में तैयार की जा सकती है। इन पर स्पर किस्में तैयार करने की स्थिति में पौधों का घनत्व बढ़ा दिया जाता है। मैं इस लेख के माध्यम से केवल उन रूटस्टाॅक्स के बारे में ही बात करूंगा जो हमारे प्रदेश में प्रचलन में है।

एम 9
एम 9 रूटस्टाॅक विश्व में सबसे ज्यादा बागीचे तैयार किए गए है। व्यासायिक खेती के उद्देश्य से एम 9 रूटस्टाॅक पर सबसे छोटे आकार के पौधों का बागीचा तैयार किया जाता है। इस रूटस्टाॅक पर तैयार किया गया सेब का पौधा आठ से दस फुट की ऊंचाई तक बढ़ता है और व्यस्क होने पर लगभग बीस किलो फल देता है। इस पौधे को आजीवन सहारे की आवश्यकता रहती है। यह जल्दी बड़ा हो जाता है और आमतौर पर दो से तीन वर्षोंं के भीतर ही फल देना आरंभ कर देता है। इसकी जडें छिछली होने के कारण पौधे को नियमित सिंचाई की आवश्यक्ता रहती है। यह पौधा काॅलर राॅट बीमारी का अवरोधक माना जाता है।

एम 26
एम 26 रूटस्टाॅक पर पौधा अधिकतर 10 से 12 फुट तक बढ़ता है और दो से तीन वर्षोंं में फल देने लगता है। हालांकि इसे भी एम 9 की तरह सहारे की ज़रूरत होती है। इस रूटस्टाॅक पर तैयार की गई सेब की किस्में तकरीबन 30 किलो तक पैदावार देने में सक्षम होती है। लेकिन यह एम 9 मुकाबले छोटे आकार का फल देता हैं। यह रूटस्टाॅक अधिक नमी वाली जगहों के लिए उप्युक्त नहीं है और काॅलर राॅट के प्रति संवेदनशील होता है।

एम 7
एम 7 रूटस्टाॅक पर पौधे 15 फीट की ऊंचाई तक बढ़ते हैं। पौधा मज़बूत होता है और जल्दी परिपक्व होने के चलते 4 से 5 वर्षों में फल देने योग्य हो जाता है। यह सभी प्रकार की मिट्टी में उग जाता है और इनमें काॅलर राॅट बीमारी के प्रति कुछ हद तक प्रतिरोधक क्षमता होती है। यह सुखे की स्थित को झेलने वाला रूटसटाॅक माना जाता है। लेकिन इनमें अत्यधिक मात्रा में रूट सकर (जड़वे) निकलते रहते हैं और यह आठ से दस वर्षो बाद चालीस से पचास किलो तक फल देता है।

एम एम 106
यह रूटस्टाॅक पैदावार और फलों की गुणवत्ता के लिहाज़ से एम 9 के बाद सबसे अधिक उप्युक्त माना गया है। इस रूटस्टाॅक पर पौधा 15 से 18 फीट की ऊंचाई तक बढ़ता है और एम 7 के अनुरूप 4 से 5 वर्षोंं में फसल देना शुरू करता है और दस वर्षाें में साठ किलो फल देने लायक हो जाता है। अधिक नमी वाली और चिकनी मिट्टी इसके विकास के लिए उप्युक्त नहीं है क्योंकि यह पौधा काॅलर राॅट के लिए संवेदनशील है।

एम एम 111
यह रूटस्टाॅक अत्यधिक प्रबल वृद्धि वाला होता है जोकि 18 से 20 फीट की ऊंचाई तक बढता है। इस पर तैयार पौधा 5 से 7 वर्षों में फल देने योग्य हो जाता है और मैच्योर होने पर कम से कम 80 किलो फल देने की क्षमता रखता है। यह सभी तरह की मिट्टी में उगाने योग्य, सूखे को झेलने वाले और काॅलर राॅट के प्रति मध्यम रूपर से संवेदनशील होते हैं।

एम एम 793
यह रूटस्टाॅक भी एम एम 111 की तरह अत्यधिक प्रबल वृद्धि वाला होता है और 20 फीट से अधिक ऊंचाई तक बढता है। इस पर तैयार पौधा 8 से 10 वर्षों में फल देने योग्य हो जाता है और मैच्योर होने पर 80 किलो फल देने की क्षमता रखता है। यह सभी तरह की मिट्टी में उगाने योग्य, सूखे को झेलने वाले और रि प्लांटेशन वाली जगहों के लिए सबसे उप्युक्त रूटस्टाॅक माना जाता है।

यहां ध्यान रखने योग्य है कि हमारे देश में लाल रंग वाली स्पर व सेमी स्पर रेड डिलिशियस किस्में अधिक उगाई जाती है। इन किस्मों की ग्रोथ रेट अन्य किस्मों के मुकाबले कम होती है। इसलिए इनकी उच्च घनत्व खेती के लिए हमेशा एम 7 और एम एम 106 रूटस्टाॅक को बौने रूटस्टाॅक के मुकाबले अधिक तवज्जों दी जाए। पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था होने की स्थिति में सेब की गाला और अन्य प्रबल वृद्धि वाली किस्मों की उच्च सघन खेती के लिए एम 9 सबसे बेहतर विकल्प है।