सही रुटस्टॉक के चयन में छिपा भविष्य का खज़ाना

सही रुटस्टॉक के चयन में छिपा भविष्य का खज़ाना

अनीश अम्राइक, संयुक्त सचिव यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर्स एसोसिएशन – युगा।
राज्य में सेब सीजन खत्म हो गया है। बागवान सर्दियों में होने वाले कामकाज की तैयारियों में जुट गए है। सर्दियों में सबसे महत्वपूर्ण काम नए बागीचे लगाने का होता है। बागीचों में भी इस समय नई प्लांटेशन के लिए साइल स्टेरेलाइज़ेशन, आॅर्चर्ड ले आउट और गडढे बनाने का काम शुरू हो जाता है। इस लिहाज़ से यह समय बेहद महत्वपुर्ण माना जाता है।
नया बगीचा तैयार करने की योजना बनाते समय सबसे पहले यह बात ध्यान में आती है कि बागीचे में किस प्रकार का रूटस्टाॅक लगाया जाना चाहिए? रूटस्टाॅक किसी पौधे का वह भाग होता है जिस पर किसी किस्म के फल की कलम की जाती है। रूटस्टाॅक तीन प्रकार के होते हैं सीडलिंग, टिश्यू कल्चरर्ड और क्लोनल। सीडलींग रूटस्टाॅक नर्सरी में सेब के बीज से तैयार होते हैं और बडे आकार के पौधे का निमार्ण करते हैं। टिश्यू कल्चर्ड रूटस्टाॅक लैबोरेटरी में पौधों की कोशिकाओं से तैयार किए जाते है जब्कि क्लोनल रूटस्टाॅक नर्सरियों में कई तरह की लेयरिंग विधियों से तैयार किए जाते है। हालांकि यह क्लोन टिश्यू कल्चर्ड रूटस्टाॅक से ही विकसित किए जाते हैै। इस लेख में हम केवल सेब के विभिन्न रूटस्टाॅक के बारे में बात करेंगे।
फाइल फोटो (इंटरनेट से ली गई है)
आमतौर पर देखा गया है कि बागवानों में रूटस्टाॅक को लेकर कई प्रकार की अवधारणाएं प्रचलित है। कुछ कहते है कि रूटस्टाॅक पर बहुत ही छोटे आकार के पौधे तैयार होते है और कुछ का मानना है कि इन्हें हर वक्त पानी की ज़रूरत होती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। रूटस्टाॅक पर बागवान अपनी सुविधानुसार विभिन्न आकार के पौधे तैयार कर सकते है। इसमें बौने, अर्ध बौने और स्टैंडर्ड आकार के पौधे शामिल है। इसके अलावा कुछ अर्ध बौने और सेमी विगोरस श्रेणियों के रूटस्टाॅक सूखे की स्थिति झेलने में भी सक्षम होते हैं। इनमें एमएम और एमला 111 जैसे रूटस्टाॅक शामिल हैं। कई जगहों पर गर्मियों के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी होने के चलते एमला, एम और एमएम सीरीज के 7 और 106 रूटस्टाॅक बिना सिंचाई व्यवस्था के अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
रूटस्टाॅक में इतनी अधिक विविधताएं होने के कारण उपयुक्त रूटस्टाॅक के चयन में नौसिखिया बागवानों को ख़ासी दिक्कतों का सामना करना पडता है। अपने अनुभव के आधार पर मैं समझता हूं कि सही रूटस्टाॅक का चयन फ़ल की किस्म, बागीचे की मिट्टी, सिंचाई व्यवस्था और आसपास के परिवेश को देखकर किया जानी चाहिए। बौने और अर्ध बौने रूटस्टाॅक्स का चयन भूरभूरी या नई मिट्टी, पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था, अधिक तेज़ी से बढ़ने वाली किस्म, कम व मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों और पौधों को सहारा देने के लिए पर्याप्त संसाधन होने की स्थिति में ही किया जाना चाहिए। मैंने यह देखा है कि सेब की रेड डिलीश्यिस प्रजाती की स्पर व सेमी स्पर किस्मों की उच्च घनत्व खेती के लिए अर्ध बौने रूटस्टाॅक ( 7 और 106) का चयन किया जाना चाहिए। क्योंकि ऐसी किस्मों के पौधों की ग्रोथ बहुत कम होती है जिसके कारण उच्च घनत्व खेती में बौने रूटस्टाॅक पर इस किस्म के पौधों का सही आकार नहीं बन पाता और फलोत्पादन में कमी आती है। जिन क्षेत्रों में गर्मी के महिनों में अधिक धूप गिरनेे के कारण सूखा पड़ता है वहां लगभग सभी प्रकार के रूटस्टाॅक को उनकी ज़रूरत के अनुसार सिचांई की आवश्यकता होती है।
रूटस्टाॅक के चयन के दौरान मन में सबसे महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि सीडलिंग और क्लोनल रूटस्टाॅक में कौन सा रूटस्टाॅक बेहतर है। कुछ लोगों का मानना है कि क्लोनल रूटस्टाॅक पर सीडलिंग के मुकाबले बेहतर गुणवत्ता का फल तैयार होता है। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि क्लोनल रूटस्टाॅक की कैनाॅपी सीडलिंग के मुकाबले छोटे आकार की होती है। इसके चलते इन पौधों में हवा और धूप कैनाॅपी के भीतरी हिस्से तक पहूंचती है जब्कि बीजू रूटस्टाॅक पर तैयार किए गए पौधों में कैनाॅपी का आकार बड़ा होने के कारण यह संभव नहीं होता। इसकी दूसरी वजह पोषण प्रबंधन में भिन्नता होना भी है। यदि सीडलिंग रूटस्टाॅक का प्रबंधन भी क्लोनल रूटस्टाॅक की तरह किया जाए तो उसमें भी क्वालिटी फ्रूट उत्पादन संभव है।
रूटस्टाॅक का चयन बगीचे के घनत्व के आधर पर किया जाता है। इसमें फल की किस्म की भी आंशिक भूमिका रहती है। उच्च घनत्व खेती के लिए हमेशा बौने और अर्ध बौनी किस्म के रूटस्टाॅक का इस्तेमाल किया जाता है। सीडलिंग रूटस्टाॅक पर उच्च घनत्व खेती करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि इसके लिए बागवान को अतिरिक्त मेहनत करनी पडती है जिसकी वजह से उत्पादन लागत में वृद्धि हो सकती है। हिमाचल की ढलानदार ज़मीन मध्यम घनत्व खेती के उपयुक्त पाई गई है जिसके लिए आवश्यक्तानुसार अर्धबौने रूटस्टाॅक से लेकर सीडलिंग तक प्रयोग किए जा सकते है। कुछ बागवान अपने बगीचों में सीडलिंग पर उच्च घनत्व खेती करने का प्रयोग कर रहे हैं। अगर ऐसे प्रयोग सफल होते है तो हमारे लिए अच्छी खबर होगी क्योंकि हमारे अधिकतर बगीचों में सिंचाई व्यवस्था नहीं है और सीडलिंग ऐसी जगहों के लिए सबसे उपयुक्त रुट स्टॉक है।
आधुनिक तकनीकों और इंटरनेट के दौर में कई बागवान क्लनल रूटस्टाॅक पर बागीचे तैयार कर रहे है। लेकिन कुछ बागवान देखा देखी में ऐसा कर रहे है जिसकी वजह से जानकारी के आभाव में वह असफल हो जाते हैं। अधिकतर बागवान एम 9 जैसे बौने रूट्स्टॉक पर स्पर किस्मों की उच्च घनत्व खेती कर रहे है। यह बिल्कुल सही प्रैक्टिस नहीं है। इस स्थिति में पौधे का सही आकार न बन पाने की वजह से कम उत्पादन होता है जिससे एचडीपी का फायदा नहीं मिल पाता। इसलिए सोच समझ कर परिस्थितियों के अनुसार सही रूटस्टाॅक का चयन किया जाना चाहिए क्योंकि सही रूटस्टाॅक के चयन में छिपा है भविष्य का खज़ाना।